गुरुवार, 14 अगस्त 2014

हर खुशी क़ुर्बान कर डालो वतन के नाम पर

हर खुशी क़ुर्बान कर डालो वतन के नाम पर ,
याद रक्खो अपनी आज़ादी को हर हर गाम पर,
मुस्कुराते ही रहो तुम गर्दिशे अय्याम पर ,
और नज़र अपनी रक्खो आगाज़ पर अंजाम पर,
बढ के हम डाले सितारों पर कमंदे कामयाब !
हिंद का हर बच्चा बच्चा काश देखे एसे ख्वाब !!


मुस्तक़िल अपने इरादे अज़्म हो अपना ॼवाँ ,
लहलहाती खेतियाँ हो, जगमगाते आशीयाँ,
मुस्कुराती बस्तीयाँ हो, खिल्खिलाते गुल्सिताँ ,
और हो हर एक दिल में प्यार  के चश्मे रवाँ,
सर पे आज़ादी के भी अम्नो अमाँ का ताज हो !
हो गरीबी खत्म खुशहाली का घर घर राज हो !!

आरज़ू हे काश में भी एक दिन एसा बनूँ,
में हूँ आइना वतन क पत्थरोँ से क्यु डरूँ,



आज भी मुझको "शिहाब" अपने वतन पर नाज़ हे !
इत्तेहादो अमन की ये एक हसीन आवाज़ हे !!
                                एजाज़ उल हक़ "शिहाब" अज़ीज़ी, जयपुर


गर्दिशे अय्याम - परेशानी का वक़्त,  मुस्तक़िल- मज़बूतअज़्म - होंसला, चश्मे रवाँ - झरने चलना, इत्तेहादो अमन - भाईचारा
 







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