हर खुशी क़ुर्बान कर डालो वतन के नाम पर ,
याद रक्खो अपनी आज़ादी को हर हर गाम पर,
मुस्कुराते ही रहो तुम गर्दिशे अय्याम पर ,
और नज़र अपनी रक्खो आगाज़ पर अंजाम पर,
बढ के हम डाले सितारों पर कमंदे कामयाब !
हिंद का हर बच्चा बच्चा काश देखे एसे ख्वाब !!
मुस्तक़िल अपने इरादे अज़्म हो अपना ॼवाँ
,
लहलहाती खेतियाँ हो, जगमगाते आशीयाँ,
मुस्कुराती बस्तीयाँ हो, खिल्खिलाते गुल्सिताँ ,
और हो हर एक दिल में प्यार के चश्मे रवाँ,
सर पे आज़ादी के भी अम्नो अमाँ का ताज हो !
हो गरीबी खत्म खुशहाली का घर घर राज हो !!
आरज़ू हे काश में भी एक दिन एसा बनूँ,
में हूँ आइना वतन क पत्थरोँ से क्यु डरूँ,
आज भी मुझको "शिहाब" अपने वतन पर नाज़ हे !
इत्तेहादो अमन की ये एक हसीन आवाज़ हे !!
एजाज़ उल हक़ "शिहाब" अज़ीज़ी, जयपुर
गर्दिशे अय्याम - परेशानी का वक़्त, मुस्तक़िल- मज़बूत, अज़्म - होंसला, चश्मे रवाँ - झरने चलना, इत्तेहादो अमन - भाईचारा
behad khubsoorat nazm....badhaayee ho nazm k saath hamse rubaroo hone k liye..
जवाब देंहटाएंbas likhterahiye .....shubhkamnaayen.........Ehsaas!